यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019

तुलसीदल कब तोडना चाहिए कब नहीं


तुलसीदल कब तोडना चाहिए कब नहीं इस विषय पर शास्त्रोंमें निर्णय दिया गया है। उन वाक्योंको एक एक करके रखा जाता है।
वैधृतौ च व्यतिपाते भौमभार्गवभानुषु।
पर्वद्वये च संक्रान्तौ द्वादश्यां सूतकद्वये।।
तुलसीं ये विचिन्वन्ति ते छिन्दन्ति हरेः शिरः। स्मृतिसार
जो मनुष्य वैधृति तथा व्यतिपात योगमें मंगलवार शुक्रवार तथा रविवारको एवं दोनों पर्व अर्थात् अमावास्या तथा संक्रान्तिको द्वादशी तिथिमें एवं मरण जनन आशौचमें तुलसीदल का छेदन करता है वह साक्षात् भगवानका सिर छेदन करता है। अतः इन दिनों में तुलसी दल नहीं तोडना चाहिए।
विष्णुधर्मोत्तर पुराणमें कहा गया है-
संक्रान्तौ अर्कपक्षान्ते द्वादश्यां निशिसन्ध्ययोः ।
यैश्छिन्नं तुलसीपत्रं तैश्छिन्नं हरिमस्तकम्।।
जो संक्रान्ति, पूर्णिमा, अमावास्या, द्वादशी तिथी, रात्रीकाल एवं दोनों सन्ध्याके समयमें तुलसी पत्र छेदन करता है, वह भगवान श्रीहरिका मस्तक छेदन करनेके समान कार्य करता है।
अतः सज्जन साधकको इस विषयमें ध्यान रखते हुए तुलसी पत्र तोडना चाहिए तुलसी पत्र तोडनेके लिए मंत्र विहित हैं। 

कोई टिप्पणी नहीं:

श्री विष्णु विजय स्तोत्रम् shri vishnu vijay stotram hindi translation पद्म पुराणोक्त विष्णु विजय स्तोत्र हिन्दी व्याख्या

shri vishnu vijay stotram hindie translation श्री विष्णु विजय स्तोत्रम् shri vishnu vijay stotram hindie translation विष्णु विजय स्तोत्र हिन...