काली अथवा
आद्या गायत्री –
1. कालिकायै च
विद्महे श्मशानवासिन्यै च धीमहि तन्नो घोरे प्रचोदयात्।
गायत्री का कम
से कम दस जप करने से महापातकी भी मुक्त
होता है।
इस गायत्रीके
जप तथा पुरश्चरण करने से रामको रावण वध से जो ब्रह्महत्या लगा था वह कट गया।
परशुराम इसी
गायत्रीके जप से मातृवध से मुक्त हुए।
सुरापानसे
श्रीकृष्णको जो ब्रह्महत्या लगा था, इसी गायत्रीके जपसे समाप्त हुआ।
ब्राह्मणशिरच्छेदनके
दोष से रुद्रभगवान मुक्त हुए।
तारा
महाविद्या की गायत्री –
2.
तारयै च विद्महे महोग्रायै च धीमहि
तन्नो देवि प्रचोदयात्।
छिन्नमस्ता
(छिन्ना) की गायत्री –
3.
वैरोचन्यै च विद्महे छिन्नमस्तायै
च धीमहि तन्नो देवि प्रचोदयात्।
त्रिपुरसुन्दरी
गायत्री –
4.
त्रिपुरादेव्यै च विद्महे क्लीं
कामेश्वर्यै च धीमहि तन्नो क्लिन्ने प्रचोदयात्।
भैरवी की
गायत्री –
5.
त्रिपुरायै च विद्महे भैरव्यै च
धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्।
कमला गायत्री
–
6.
महालक्ष्म्यै च विद्महे महाश्रियै
च धीमहि तन्नो श्रीः प्रचोदयात्।
भुवनेश्वरी
गायत्री –
7.
मायाबीजभुवनेश्वर्यै च विद्महे
आद्यायै च धीमहि तन्नो देवि प्रचोदयात्।
मातङ्गा
गायत्री –
8.
शुकप्रियायै विद्महे
श्रीकामेश्वर्यै धीमहि। तन्नः श्यामा प्रचोदयात्।
धूमावती
गायत्री –
9.
धूंधमावत्यै च विद्महे विवर्णादेव्यै
च धीमहि तन्नो घोरे प्रचोदयात्।
बगलामुखी
गायत्री –
10. स्थिरमायाबगलायै च विद्महे
दुष्टस्तम्भिन्यै च धीमहि तन्नो देवि प्रचोदयात्।
1 टिप्पणी:
आपको बहुत बहुत धन्यवाद
एक टिप्पणी भेजें