ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कृष्णाय गोविन्दवल्लभाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरूषाय परमात्मने परकर्म-मन्त्र-तन्त्र-यन्त्र-अक्षत-विष-आभिचार-अस्त्र-शस्त्रान् संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय। ॐ नमो भगवते महा सुदर्शनाय ॐ प्रों रीं रं दीप्त्रे ज्वालापरिताय सर्वदिग्क्षोभणकराय फट् परब्रह्मणे परंज्योतिषे स्वाहा। ॐ नमो भगवते सुदर्शनाय ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय महाचक्राय महा ज्वालाय सर्वरोगप्रशमनाय कर्मबन्धविमोक्षणाय पादादिमस्तकपर्यन्तम्, वातजनितरोगान् नः पित्तजनितरोगान् नः श्लेष्मजनितरोगान् नः धातुसंकलिकोद्भवान्नः नानाविकाररोगान् नः नाशय नाशय प्रशमय प्रशमय आरोग्यं देहि देहि ॐ सहस्रार हुं फट् स्वाहा।
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1 टिप्पणी:
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